U.S.-Israel Attack on Iran 2026: महायुद्ध की दहलीज पर दुनिया: अमेरिका और इजरायल का ईरान पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury)

U.S.-Israel Attack on Iran 2026

28 फरवरी 2026 की सुबह जब दुनिया की आधी आबादी सो रही थी, तब मध्य पूर्व (Middle East) के आसमान में लगी आग ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। दशकों से चली आ रही जुबानी जंग और परोक्ष युद्ध (Proxy War) ने एक ऐसा मोड़ लिया, जिसकी कल्पना भी डरावनी थी। संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक व्यापक सैन्य अभियान की घोषणा की, जिसे अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) और इजरायल ने ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ (Operation Roaring Lion) का नाम दिया।

यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि दुनिया के नक्शे को बदलने और सत्ता के समीकरणों को हिला देने वाली एक बड़ी कूटनीतिक और सामरिक चाल थी। तेहरान के आसमान में गूंजते धमाकों ने यह साफ कर दिया कि अब कूटनीति की मेज पीछे छूट चुकी है और मैदान-ए-जंग ही अंतिम निर्णय करेगा।

हमले की रणनीति और प्रमुख लक्ष्य

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी करते हुए स्पष्ट किया कि इस हमले का उद्देश्य केवल ईरान की सैन्य शक्ति को कम करना नहीं, बल्कि उसे परमाणु शक्ति बनने से हमेशा के लिए रोकना है।

प्रमुख निशाने पर क्या था?

  1. परमाणु ठिकाने (Nuclear Facilities): इस्फ़हान, कोम (Qom), बुशहर और पारचिन के परमाणु केंद्रों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल उन भूमिगत प्रयोगशालाओं को नष्ट करने के लिए किया गया जहाँ ईरान यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) कर रहा था।
  2. नेतृत्व का केंद्र (Leadership Targets): यह पहली बार था जब सीधे तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के निवास को निशाना बनाने की खबरें आईं। उपग्रह चित्रों में खामेनेई के परिसर में भारी क्षति देखी गई है।
  3. मिसाइल इंफ्रास्ट्रक्चर: ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल यूनिट्स और रडार सिस्टम को पहले चरण में ही ध्वस्त करने की कोशिश की गई ताकि उसकी जवाबी क्षमता को खत्म किया जा सके।

ट्रम्प का ‘तख्तापलट’ का आह्वान

राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए ईरान की जनता से सीधे अपील की। उन्होंने कहा:

“ईरान के महान और गर्वित लोगों, आपकी आजादी का समय आ गया है। हम आपके दुश्मन नहीं हैं, हम उस शासन के दुश्मन हैं जिसने आपको दशकों से बंधक बना रखा है। अपनी सरकार पर नियंत्रण करो, यह मौका फिर नहीं आएगा।”

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की यह रणनीति 2003 के इराक युद्ध की याद दिलाती है, जहाँ उद्देश्य केवल सैन्य जीत नहीं बल्कि ‘सत्ता परिवर्तन’ (Regime Change) था। हालांकि, यह देखना बाकी है कि ईरानी जनता, जो पहले से ही आर्थिक प्रतिबंधों और आंतरिक विरोध प्रदर्शनों से जूझ रही है, इस आह्वान पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

ईरान का पलटवार: ‘विनाशकारी प्रतिशोध’

हमले के कुछ ही घंटों के भीतर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने ‘क्रशिंग’ (विनाशकारी) जवाबी कार्रवाई का वादा किया। तेहरान ने न केवल इजरायल पर मिसाइलें दागीं, बल्कि उन खाड़ी देशों को भी निशाना बनाया जहाँ अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।

क्षेत्रीय तनाव की स्थिति:

  • इजरायल में अलर्ट: तेल अवीव और यरूशलेम में सायरन बज रहे हैं। इजरायली स्वास्थ्य मंत्रालय ने अस्पतालों को भूमिगत क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया है।
  • खाड़ी देशों पर हमला: बहरीन में अमेरिकी 5वें बेड़े (5th Fleet), कतर में अल-उदेद एयरबेस और यूएई में अल-धफरा एयरबेस पर ईरानी मिसाइलें गिरने की खबरें हैं। दुबई और अबू धाबी के आसमान में इंटरसेप्टर मिसाइलों की चमक देखी गई।
  • मानवीय क्षति: दुखद रूप से, दक्षिणी ईरान के मिनाब में एक स्कूल पर हुए हमले में लगभग 40-57 छात्रों की मौत की खबर आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल का संकट

मध्य पूर्व दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र है। हमले की खबर फैलते ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी दी है, जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई समुद्री तेल परिवहन होता है। यदि यह मार्ग बंद होता है, तो वैश्विक महंगाई एक ऐसे स्तर पर पहुँच सकती है जिसे संभालना नामुमकिन होगा।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं

दुनिया इस समय दो गुटों में बंटी नजर आ रही है:

  1. संयुक्त राष्ट्र (UN): महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने तत्काल युद्धविराम की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यह संघर्ष “अकल्पनीय विनाश” की ओर ले जा सकता है।
  2. भारत का रुख: भारत ने “अत्यधिक संयम” बरतने की अपील की है। मध्य पूर्व में लगभग 9.7 मिलियन भारतीय रहते हैं, उनकी सुरक्षा भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
  3. रूस और चीन: दोनों देशों ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाई की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत है?

28 फरवरी 2026 की यह तारीख इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों में दर्ज होगी। क्या यह हमला ईरान को बातचीत की मेज पर लाएगा, या यह पूरे क्षेत्र को एक ऐसी आग में झोंक देगा जिसे बुझाना किसी के बस में नहीं होगा?

फिलहाल, दुनिया केवल प्रार्थना कर सकती है कि कूटनीति को एक और मौका मिले, क्योंकि आधुनिक युद्ध में कोई विजेता नहीं होता, केवल हारने वाले होते हैं और सबसे ज्यादा हार उस आम इंसान की होती है जो केवल शांति से जीना चाहता है।

Disclaimer: यह सामग्री 28 फरवरी, 2026 तक की चल रही रिपोर्टों पर आधारित है। प्रदान की गई जानकारी केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। पाठकों को वास्तविक समय के सुरक्षा निर्देशों और सत्यापित समाचारों के लिए आधिकारिक सरकारी अपडेट का पालन करने की सलाह दी जाती है। व्यक्त किए गए विचार आवश्यक रूप से किसी विशिष्ट सरकार की आधिकारिक नीति को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।

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