Middle East war latest update: जब दुबई, रियाद और तेहरान के आसमान ने आग उगलना शुरू किया
28 फरवरी 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों से दर्ज किया जाएगा। सालों से चली आ रही ‘छद्म युद्ध’ (Proxy War) की कड़वाहट ने शनिवार को एक ऐसे भीषण युद्ध का रूप ले लिया, जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। सुबह की पहली किरण के साथ ही खबर आई कि इज़रायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) का आगाज़ कर दिया है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई; इसके कुछ ही घंटों बाद ईरान ने पलटवार करते हुए उन शहरों को निशाना बनाया जो दुनिया के व्यापार और पर्यटन के केंद्र माने जाते हैं दुबई और रियाद।
दुबई: ‘सिटी ऑफ गोल्ड’ में दहशत का साया
दुबई, जो अपनी गगनचुंबी इमारतों और शांत समुद्री किनारों के लिए जाना जाता है, शनिवार की दोपहर अचानक दहल उठा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आसमान में आग के गोले (मिसाइलें) देखे गए। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि ईरान ने दुबई और अबू धाबी को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।
हालांकि यूएई की मिसाइल डिफेंस प्रणाली ने अधिकांश खतरों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन गिरते हुए मलबे ने तबाही मचा दी। अबू धाबी में मलबे की चपेट में आने से एक एशियाई प्रवासी की जान चली गई। वहीं, दुबई के मशहूर ‘पाम जुमेराह’ (Palm Jumeirah) इलाके में एक इमारत में आग लगने की खबर आई, जिसमें चार लोग घायल हुए हैं। दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जो दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक है, को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया, जिससे हजारों यात्री बीच रास्ते में ही फंस गए।
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— iffi (@iffiViews) February 28, 2026
रियाद: सऊदी अरब के शौर्य की परीक्षा
सऊदी अरब की राजधानी रियाद भी ईरान के गुस्से से अछूती नहीं रही। रियाद और उसके पूर्वी प्रांतों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। सऊदी रक्षा बलों ने ईरान के इस ‘कायरतापूर्ण हमले’ की कड़ी निंदा की और बताया कि उनकी इंटरसेप्टर मिसाइलों ने रियाद की ओर आ रही ईरानी मिसाइलों को मार गिराया।
सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने एक सख्त बयान जारी करते हुए कहा कि वे अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। यह हमला तब हुआ जब रियाद एक शांतिपूर्ण समाधान की उम्मीद कर रहा था, लेकिन ईरान के इस कदम ने खाड़ी देशों के बीच के कूटनीतिक रिश्तों को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है।
ईरान का आसमान: इज़रायली जेट्स की गर्जना
वहीं दूसरी ओर, ईरान के भीतर स्थिति और भी भयावह है। इज़रायली वायु सेना के एफ-35 और अन्य आधुनिक जेट्स ने तेहरान, कोम और बुशहर जैसे शहरों के ऊपर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में इज़रायली जेट्स को ईरान की राजधानी के ऊपर उड़ते और रणनीतिक ठिकानों पर बमबारी करते देखा जा सकता है।
खबरों के अनुसार, इज़रायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु केंद्रों और मिसाइल लॉन्च पैड्स को निशाना बनाया है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ का लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमता को पूरी तरह से पंगु बनाना है। इस हमले में कथित तौर पर ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के आवास के आसपास भी धमाके हुए हैं, जिसके बाद उन्हें एक सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है।
युद्ध का मानवीय पहलू: मासूमों की बलि
युद्ध कभी भी केवल सेनाओं के बीच नहीं होता, इसकी सबसे बड़ी कीमत आम जनता चुकाती है। ईरान के मीनाब (Minab) शहर से दिल दहला देने वाली खबर आई है, जहाँ एक स्कूल पर हुई बमबारी में 40 से अधिक छात्राओं के मारे जाने की आशंका है। वहीं खाड़ी देशों में रह रहे लाखों प्रवासी भारतीय और अन्य विदेशी नागरिक अपनी जान बचाने के लिए बंकरों की तलाश कर रहे हैं।
तेहरान की सड़कों पर दहशत का माहौल है। पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी हैं और लोग शहर छोड़कर भागने की कोशिश कर रहे हैं। यही हाल दुबई और रियाद का है, जहाँ लोग घरों में कैद हैं और टीवी-रेडियो पर पल-पल की खबरें सुन रहे हैं।
सामरिक विश्लेषण: क्यों भड़की यह आग?
इस युद्ध की जड़ें पिछले कई महीनों से तैयार हो रही थीं। डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिका और बेंजामिन नेतन्याहू के इज़रायल का मानना है कि ईरान ने अपनी परमाणु क्षमता को उस स्तर तक पहुँचा दिया है, जहाँ से वापसी संभव नहीं। अमेरिका ने इसे ‘अंतिम समाधान’ के तौर पर पेश किया है।
दूसरी ओर, ईरान का मानना है कि उसे चारों ओर से घेरने की कोशिश की जा रही है। उसने अपने सहयोगी गुटों हिजबुल्लाह, हूतियों और पीएमएफ—को भी सक्रिय कर दिया है। कुवैत, कतर और बहरीन में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर भी हमले हुए हैं, जिससे यह युद्ध अब केवल दो देशों के बीच न रहकर एक क्षेत्रीय महायुद्ध (Regional War) बन गया है।
भारत के लिए चिंता का विषय
भारत के लिए यह स्थिति किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है। लगभग 9.7 मिलियन (97 लाख) भारतीय नागरिक खाड़ी देशों में रहते हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक आपातकालीन एडवाइजरी जारी की है और नागरिकों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है। अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
शांति की उम्मीद धुंधली
वर्तमान में पश्चिम एशिया एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहाँ से शांति का रास्ता दिखाई नहीं दे रहा। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है, लेकिन अमेरिका और इज़रायल के आक्रामक रुख को देखते हुए ऐसा लगता है कि यह संघर्ष अभी और गहराएगा।
क्या दुनिया एक और विनाशकारी युद्ध की ओर बढ़ रही है? क्या कूटनीति के दरवाजे पूरी तरह बंद हो चुके हैं? इन सवालों के जवाब आने वाले चंद घंटों में मिल जाएंगे। फिलहाल, पूरी दुनिया की नज़रें दुबई के बुर्ज खलीफा से लेकर तेहरान की आज़ादी टावर तक फैली उस धुंध पर टिकी हैं, जो बारूद के धुएं से पैदा हुई है।
Disclaimer (अस्वीकरण)
यह लेख 28 फरवरी 2026 को पश्चिम एशिया में विकसित हो रही अत्यधिक अस्थिर स्थिति पर आधारित है। दी गई जानकारी उस समय उपलब्ध आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय समाचार स्रोतों से ली गई है। चूँकि युद्ध की स्थिति में सूचनाएं तेज़ी से बदलती हैं, इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे ताज़ा अपडेट के लिए आधिकारिक सरकारी माध्यमों और प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनलों का अनुसरण करें। यह लेख किसी भी देश या संगठन के प्रति पूर्वाग्रह नहीं रखता है और केवल मानवीय और सामरिक परिप्रेक्ष्य को उजागर करता है।
